लोक भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘वसंतोत्सव-2026’ का हुआ शुभारंभ
लोक भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘वसंतोत्सव-2026’ का हुआ शुभारंभ
लोक भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘वसंतोत्सव-2026’ का शुभारंभ प्रकृति, संस्कृति और नवाचार के सुंदर संगम के साथ किया। रंग-बिरंगे पुष्पों की मनोहारी छटा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मधुरता ने वातावरण को उल्लास और ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर हिमालय की प्राचीन परंपरा और ज्ञान-संस्कृति के अमूल्य प्रतीक भोजपत्र पर आधारित विशेष डाक आवरण का विमोचन करना मेरे लिए विशेष क्षण रहा। यह हमारी जड़ों, हमारी विरासत और हमारी पहचान का प्रतीक है।
लोक भवन में आयोजित ‘वसंतोत्सव–2026’ की थीम “Floral Healing – Nature’s Path to Well-being” केवल पुष्प प्रदर्शनी तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति की उपचारात्मक शक्ति को अनुभव करने का प्रयास है। फूलों की सुगंध, रंगों की समरसता और उनकी ऊर्जा मानव मन व शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, यही भाव इस आयोजन की आत्मा है। पारिस्थितिक संतुलन, सांस्कृतिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक सूत्र में पिरोते हुए यह उत्सव हमें प्रकृति के और निकट लाता है तथा आंतरिक शांति, स्वास्थ्य और नवचेतना का संदेश देता है।
उत्तराखण्ड की पुष्प संपदा, औषधीय पौधों और स्थानीय उत्पादों में केवल संभावनाएँ ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और समृद्धि का भविष्य भी निहित है। ‘वसंतोत्सव’ प्रकृति से जुड़ने, नवचेतना को अपनाने और सामूहिक ऊर्जा को उत्सव में बदलने का अवसर है। मैं सभी प्रदेशवासियों से हृदयपूर्वक आग्रह करता हूँ कि परिवार सहित पधारकर इस आनंद, सकारात्मकता और नवआरंभ के पर्व का हिस्सा बनें।
लोक भवन में आयोजित तीन दिवसीय ‘वसंतोत्सव-2026’ का शुभारंभ प्रकृति, संस्कृति और नवाचार के सुंदर संगम के साथ किया। रंग-बिरंगे पुष्पों की मनोहारी छटा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मधुरता ने वातावरण को उल्लास और ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर हिमालय की प्राचीन परंपरा और ज्ञान-संस्कृति के अमूल्य प्रतीक भोजपत्र पर आधारित विशेष डाक आवरण का विमोचन करना मेरे लिए विशेष क्षण रहा। यह हमारी जड़ों, हमारी विरासत और हमारी पहचान का प्रतीक है।
लोक भवन में आयोजित ‘वसंतोत्सव–2026’ की थीम “Floral Healing – Nature’s Path to Well-being” केवल पुष्प प्रदर्शनी तक सीमित नहीं, बल्कि प्रकृति की उपचारात्मक शक्ति को अनुभव करने का प्रयास है। फूलों की सुगंध, रंगों की समरसता और उनकी ऊर्जा मानव मन व शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, यही भाव इस आयोजन की आत्मा है। पारिस्थितिक संतुलन, सांस्कृतिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक सूत्र में पिरोते हुए यह उत्सव हमें प्रकृति के और निकट लाता है तथा आंतरिक शांति, स्वास्थ्य और नवचेतना का संदेश देता है।
उत्तराखण्ड की पुष्प संपदा, औषधीय पौधों और स्थानीय उत्पादों में केवल संभावनाएँ ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और समृद्धि का भविष्य भी निहित है। ‘वसंतोत्सव’ प्रकृति से जुड़ने, नवचेतना को अपनाने और सामूहिक ऊर्जा को उत्सव में बदलने का अवसर है। मैं सभी प्रदेशवासियों से हृदयपूर्वक आग्रह करता हूँ कि परिवार सहित पधारकर इस आनंद, सकारात्मकता और नवआरंभ के पर्व का हिस्सा बनें।
देहरादून —मोनू राजवान ✍️✍️✍️
