उत्तराखंड में गर्म पानी के स्रोत बनेंगे पर्यटन का नया आकर्षण केंद्र, जियोथर्मल पूल बनाने की है तैयारी

उत्तराखंड में एक तरफ जियोथर्मल स्प्रिंग से बनाई जाएगी बिजली, दूसरी तरफ जियोथर्मल पूल में पर्यटक लेंगे गर्म पानी में नहाने का मजा, जानिए योजना

देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग (गर्म कुंड) के जरिए एक ओर सरकार बिजली उत्पादन करने की दिशा में काम कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर पर्यटन विभाग इन गर्म पानी के स्रोतों के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम कर रहा है. योजना के तहत जियोथर्मल पूल बनाने की कवायद की जा रही है.

दरअसल, विदेशों में मौजूद तप्त कुंड का इस्तेमाल, बिजली के साथ ही डोमेस्टिक हीटिंग के लिए भी किया जा रहा है. इसी को देखते हुए उत्तराखंड पर्यटन विभाग भी हॉट स्प्रिंग के जरिए पर्यटकों को स्नान की सुविधा देने की योजना तैयार कर रहा है. ऐसे में प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत अब पर्यटन विकास की नई पहचान बन सकते हैं. आखिर बिजली के अलावा और कितना फायदेमंद साबित हो सकता है तप्त कुंड, पर्यटन विभाग की क्या है योजना? आपको इससे रूबरू करवाते हैं.

पिथौरागढ़ के मदकोट में जियोथर्मल पूल बनाने की योजना: प्रदेश में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स को पर्यटक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में पहल शुरू की जा रही है. जिसके तहत पिथौरागढ़ जिले के मदकोट से इसकी शुरुआत किए जाने की तैयारी है. जहां गर्म पानी के स्रोत के आस पास स्नान की सुविधा विकसित किए जाने का प्रस्ताव है. मदकोट में प्रस्तावित योजना के तहत पर्यटकों के लिए जियोथर्मल पूल और ठहरने की सुविधाएं विकसित करने की योजना है. गर्म पानी के स्रोत से मिलने वाले पानी का उपयोग स्नान के लिए किया जाएगा.

जियोथर्मल स्प्रिंग्स के क्या हो सकते हैं फायदे?

पिथौरागढ़ में गोरी नदी के आस पास जियोथर्मल स्प्रिंग बेल्ट मौजूद: वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों की ओर से किए गए अध्ययन के मुताबिक, उत्तराखंड में 40 जियोथर्मल स्प्रिंग्स चिह्नित किए गए हैं. खास बात ये है कि कुमाऊं क्षेत्र में पिथौरागढ़ जिले के गोरी नदी के आस पास करीब 13 किलोमीटर के क्षेत्र में जियोथर्मल स्प्रिंग बेल्ट मौजूद है. जहां कई जियोथर्मल स्प्रिंग्स हैं.

इन प्राकृतिक स्रोतों का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर अलग-अलग जरूरतों के लिए भी किया जाता रहा है. ऐसे में अब सरकार की कोशिश है कि पर्यटन के लिहाज से उपयुक्त स्थानों को विकसित कर इन्हें राज्य के पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए. ऐसे में मदकोट की योजना सफल रहा, तो अन्य जियोथर्मल स्प्रिंग्स पर भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित की जा सकती है.

क्या बोले पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल? वहीं, पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने कहा कि, राज्य में नए पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में पिथौरागढ़ के मदकोट को आधुनिक पर्यटक सुविधा से जोड़ने की योजना तैयार की गई है. जहां पर कॉटेज, ठहरने की सुविधा के साथ ही हाट स्प्रिंग के पानी के जरिए स्नान की सुविधा दी जाएगी. इसमें महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्थान भी बनाए जाएंगे.

इसको शुरू करने से पहले पानी की जांच, सभी सुरक्षा के पहलू आदि का अध्ययन कराया जाएगा. जिसके लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की मदद भी ली जाएगी. साथ ही कहा कि ऐसी परियोजनाओं का फायदा सिर्फ पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि, होटल, होमस्टे, खान-पान, स्थानीय परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.

वहीं, इस पूरे मामले पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि,

“बदरी विशाल का दर्शन करने के लिए पैदल बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्री थक जाते हैं. ऐसे में बदरीनाथ धाम के पास मौजूद तप्त कुंड के अंदर जब श्रद्धालु स्नान करने जाते हैं, तो उनकी थकान दूर हो जाती है. ऐसे में पहाड़ के अंदर मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स काफी ज्यादा उपयोगी है.“- सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री, उत्तराखंड

“लिहाजा, पर्यटन के लिहाज से उसको बढ़ाए जाने पर प्रयास किया जा रहा है. विदेशों में भी जियोथर्मल स्प्रिंग्स के पानी से लोगों के नहाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में इस तरह के पहल को अपनाया जाएगा और पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा.“- सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री, उत्तराखंड

उत्तराखंड में 40 एक्टिव जियोथर्मल स्प्रिंग्स मौजूद: जियोथर्मल स्प्रिंग्स का इस्तेमाल पर्यटन के लिहाज से कितना फायदेमंद हो सकता है? इस सवाल पर वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. समीर कुमार तिवारी ने कहा कि उन्होंने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में मौजूद जियोथर्मल स्प्रिंग्स को लेकर अध्ययन किया है. अध्ययन में पाया कि उत्तराखंड राज्य में 40 एक्टिव जियोथर्मल स्प्रिंग्स मौजूद है. इसके अलावा भी अन्य जियोथर्मल स्प्रिंग्स मौजूद हैं, लेकिन वो अभी चिह्नित नहीं है.

“उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में जियोथर्मल स्प्रिंग्स की खास बात ये है कि गोरी गंगा के पास करीब 13 किलोमीटर लंबी जियोथर्मल बेल्ट है. जिसमें करीब 10 जियोथर्मल स्प्रिंग्स मौजूद है. ये स्प्रिंग्स बहुत कम ऊंचाई और प्लेन स्थान पर मौजूद है. जिसको कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. मुख्य रूप से जियोथर्मल स्पा, बलेनोथेरेपी, एक्वाकल्चर, एग्रीकल्चर, ग्रीनहाउस कल्टीवेशन समेत अन्य कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं.“- डॉ. समीर तिवारी, वैज्ञानिक, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान

कई सालों से मौजूद है कुदरती गर्म पानी: वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक समीर तिवारी ने बताया कि जियोथर्मल स्प्रिंग्स एक गॉड गिफ्टेड एनर्जी है, जो कई सौ सालों से उपलब्ध है. ऐसे में इसका बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है. क्योंकि, आने वाले कई सौ सालों तक ये उपलब्ध रहेगा. साथ ही बताया कि बलेनोथेरेपी एक स्ट्रेस को घटाने वाला तरीका है.जियोथर्मल स्प्रिंग्स के पानी से नहाना क्यों फायदेमंद? दरअसल, जियोथर्मल स्प्रिंग्स के पानी में एक एलिमेंट पाया जाता है. इस पानी में स्नान करते हैं, तो यह एलिमेंट हमारी बॉडी के साथ रिएक्शन करके बॉडी से स्ट्रेस को रिलीज करता है. यही वजह है कि स्ट्रेस को कम करने के लिए जियोथर्मल स्प्रिंग्स के पानी में नहाना सबसे अच्छी थेरेपी मानी जाती है. दुनिया के कई देशों में जियोथर्मल स्प्रिंग्स के पानी का इस्तेमाल बाथिंग के रूप में किया जा रहा है.

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