उत्तराखंड में थर्ड फ्रंट की तैयारी तेज, UKD ने भाजपा-कांग्रेस से पहले खेला बड़ा दांव, जानें किसको होगा नुकसान

उत्तराखंड में यूकेडी ने विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा-कांग्रेस से एक कदम आगे रखा है. इससे थर्ड फ्रंट पर चर्चा तेज हुई. रिपोर्ट- रोहित सोनी-

देहरादून: आगामी साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की रीजनल पार्टी उत्तराखंड क्रांति दाल थर्ड फ्रंट के रूप में उभर रही है. जबकि साल 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी थर्ड फ्रंट की भूमिका में दिखाई दी थी. हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव, प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियां भाजपा और कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है तो वहीं, दूसरी ओर इन राजनीतिक चुनौतियों के बीच उत्तराखंड क्रांति दल के साथ ही अन्य छोटी-छोटी पार्टियां भी अपनी जोर आजमाइश करने की रणनीति तैयार की है.

उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की चुनावी बिसात पर अब क्षेत्रीय दलों की चाल भी तेज हो गई है. राज्य की पुरानी क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल ने भाजपा और कांग्रेस से पहले 16 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं. पार्टी ने न केवल चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है, बल्कि आगामी चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बाद सबसे अधिक सक्रिय होकर तीसरी पार्टी बन गई है. कुछ समय पहले ही उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने पार्टी की पहली प्रत्याशी सूची जारी की थी. पार्टी ने फाइव-लेयर सिस्टम के तहत 16 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवार चुने हैं. यूकेडी की पहली सूची में सिर्फ अनुभवी चेहरे ही नहीं, बल्कि पार्टी ने दावा किया है कि इन 16 प्रत्याशियों में चार टिकट युवाओं और युवा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं.

यूकेडी के साथ ये दल आए साथ: पार्टी ने पिथौरागढ़, द्वाराहाट, देवप्रयाग, प्रतापनगर, कर्णप्रयाग, जागेश्वर, राजपुर, सल्ट, टिहरी, कपकोट, काशीपुर, नानकमत्ता, रामनगर, देहरादून कैंट, खानपुर और धनोल्टी जैसी सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं. इससे साफ है कि यूकेडी गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी दिखाना चाहती है. यूकेडी की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि वो अकेले चुनाव लड़ने के बजाय क्षेत्रीय ताकतों को एक मंच पर लाए. देहरादून में मंथन 2027-क्षेत्रीय एकता से उत्तराखंड का राजनीतिक विकल्प कार्यक्रम में 14 दलों और संगठनों ने हिस्सा लिया. इनमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, स्वाभिमान मोर्चा, राष्ट्रीय रिजनल पार्टी, समानता पार्टी, हिमालय क्रांति पार्टी, विकास पार्टी, राज्य आंदोलनकारी मंच और कई सामाजिक संगठन शामिल थे.

पिछले चुनाव में आप बनी थी थर्ड फ्रंट: साल 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने थर्ड फ्रंट की भूमिका निभाने की कोशिश की थी, लेकिन 70 में से एक भी सीट जीतने में नाकाम रही. उस चुनाव में भाजपा को 47 और कांग्रेस को 19 सीटें मिलीं, जबकि आम आदमी पार्टी को मात्र 3.3 फीसदी वोट मिले थे. ऐसे में उत्तराखंड में वोट बंटने की गुंजाइश तो है, लेकिन सीट जीतने के लिए मजबूत संगठन और स्थानीय मुद्दों काफी जरूरी है.

टिकट जारी करने का संभावित कारण: इसी तरह, इस बार यूकेडी का दांव अलग है. पार्टी ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवार घोषित कर अपने कार्यकर्ताओं को समय देने की कोशिश की है. ऐसा माना जा रहा है कि इससे टिकट को लेकर असंतोष कम होगा और मैदानी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का समय मिलेगा. भाजपा और कांग्रेस के सामने असली चुनौती ये है कि क्षेत्रीय दल भले ही कोई सीटें न जीतें, लेकिन कई सीटों पर वोट जरूर काट सकते हैं.

ज्यादा जानकारी देते हुए वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने कहा कि, यूकेडी की ताकत उसके पुराने कार्यकर्ता, राज्य आंदोलन से जुड़े चेहरे और पहाड़ी पहचान के मुद्दों में है. लेकिन चुनौती ये है कि पार्टी को अपने समर्थन को सिर्फ भावनात्मक मुद्दों से आगे बढ़ाकर रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी विकास जैसे मुद्दों पर फोकस करना होगा. क्योंकि उत्तराखंड गठन के बाद यूकेडी की कुछ सीटें तो आई लेकिन समय के साथ यूकेडी पूरी तरह से गायब हो गई. ऐसे में कांग्रेस-भाजपा की इस दौड़ में यूकेडी कितनी सीटें ला पाएगी ये तो वक्त बताएगा, लेकिन यह जरूर है कि इससे कांग्रेस को काफी अधिक नुकसान पहुंचेगा.

पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस विधानसभा चुनाव में यूकेडी की सक्रियता काफी अधिक है, ऐसे में उनका परफॉर्मेंस भी बेहतर दिखाई देगा.
-जय सिंह रावत, वरिष्ठ पत्रकार-

वहीं, यूकेडी के केंद्रीय महामंत्री देव चंद्र उत्तराखंडी ने कहा कि, राष्ट्रीय दलों ने जनता को ठग कर और जनता को बरगलाकर, चारों तरफ से ठग लिया है. क्योंकि ये राजनीतिक पार्टियां पलायन रोकने में नाकाम रही है, साथ ही यहां के बच्चों को रोजगार नहीं दे पाए हैं, स्वास्थ्य, शिक्षा नहीं दे पाए हैं.

अब लोग समझ चुके हैं कि जिन लोगों ने राज्य बनाया है, उन्होंने सही परिकल्पना की है और वही राज्य को सुधार सकते हैं. लिहाजा, जनता के मन में उत्तराखंड क्रांति दल है और यूकेडी इस बार सत्ता में होगी, ये यूकेडी का लक्ष्य है.
-देव चंद्र उत्तराखंडी, केंद्रीय महामंत्री, यूकेडी-

भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि, उत्तराखंड क्रांति दल सिर्फ अफवाह फैलने तक सीमित रह गई है. प्रदेश में कांग्रेस और यूकेडी एक समान बातों को लेकर चल रही है. साथ ही उत्तराखंड की जनता के जो सरोकार है, उससे कोशों दूर है.

यूकेडी अफवाह और भ्रम की राजनीति फैलाने में माहिर है. प्रदेश की जनता समझदार है, इसीलिए वो भाजपा के साथ है. लिहाजा एक बार फिर जनता का आशीर्वाद भाजपा को मिलने वाला है.
-कुंदन परिहार, प्रदेश महामंत्री, भाजपा-

इस पूरे मामले पर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि, जब कोई भी राजनीतिक पार्टी चुनाव लड़ती है तो वो किसी न किसी पार्टी को तो डैमेज करती ही है. लेकिन वो बीजेपी को डैमेज करेगी या कांग्रेस को? और कितना डैमेज करेगी? यह कहना संभव नहीं है. क्योंकि हर विधानसभा की परिस्थितियों अलग-अलग हैं और वहां पर चुनाव कौन लड़ रहा है? उस पर निर्भर करेगा. ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता कि अगर कोई छोटी पार्टी चुनाव लड़ रही है तो किसी एक पार्टी को नुकसान पहुंचाएगी.

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