उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों को देना होगा खर्चे का रिकॉर्ड, बदल गए अब ये नियम

1200-675-27943246-thumbnail-16x9-sachivalaya (1)

उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली 2026 में संशोधन, कर्मचारियों को चल संपत्ति के लेन-देन के मामलों में जानिए क्या हुआ?

देहरादून: उत्तराखंड में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संपत्ति खरीद एवं बिक्री के अलावा खर्चे के रिकॉर्ड को लेकर नियमों में संशोधन किया गया है. उत्तराखंड शासन ने राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली 2026 में संशोधन किया है. जिसके बाद कुछ पुराने नियमों को अब अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बदल दिया गया है.

राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली 2026 में संशोधन: उत्तराखंड शासन ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली 2026 में संशोधन किया है. राज्यपाल की स्वीकृति के बाद कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है. इस संशोधन के बाद कर्मचारियों को चल संपत्ति के लेन-देन के मामलों में बड़ी राहत मिली है.

5 हजार रुपए खर्च का नियम हुआ था विरोध: गौर हो कि पिछले साल ईटीवी भारत ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था कि पुराने आचरण नियमों के तहत यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने एक महीने के वेतन या ₹5,000 (जो भी कम हो) से अधिक मूल्य की किसी चल संपत्ति (जैसे मोबाइल, लैपटॉप, टीवी या अन्य घरेलू सामान) की खरीद-बिक्री करता था, तो उसे तुरंत विभाग को रिपोर्ट करना अनिवार्य था. जिसका तमाम कर्मचारी संगठनों ने भी विरोध किया था.

दरअसल, सालों पुरानी इस अव्यवहारिक सीमा के कारण आज के दौर में महंगाई और बढ़े हुए वेतनमान को देखते हुए कर्मचारियों को रोजमर्रा के छोटे-छोटे सामानों के लेन-देन पर भी पेचीदगियों का सामना करना पड़ता था. ऐसे में इस पर गंभीरता से विचार किया गया और अब जाकर इसमें बड़ा सुधार किया गया है. अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत की ओर से संशोधित अधिसूचना जारी भी कर दिया गया है. उन्होंने कर्मचारी आचरण नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन होने की बात कही है.

संशोधन के बाद अब क्या है नई स्थिति? नई आचरण नियमावली 2026 के नियम 22(2) में संशोधन करते हुए अब इस सीमा को बदल दिया गया है. नई व्यवस्था के मुताबिक, अब किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति के क्रय-विक्रय की सूचना एक माह के भीतर अपने नियुक्ति या समुचित प्राधिकारी को देनी होगी. इससे कर्मचारियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और छोटी-छोटी रिपोर्टिंग से राहत मिल जाएगी.

नियमावली के दूसरे अहम बिंदु-

  • सरकार से लेन-देन करने वाले व्यक्ति की परिभाषा- नियम 2 में नया खंड जोड़कर स्पष्ट किया गया है कि जो व्यक्ति, फर्म, कंपनी या ठेकेदार सरकार के साथ संविदा, निविदा, आपूर्ति या लाइसेंस आदि के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हैं, वे इस दायरे में आएंगे.
  • पूर्व स्वीकृति अनिवार्य- यदि कोई सरकारी कर्मचारी सरकार से लेन-देन करने वाले व्यक्ति के साथ किसी चल या अचल संपत्ति का लेन-देन करता है, तो उसे पूर्व स्वीकृति लेनी होगी.
  • संपत्ति का विवरण- समूह क, ख और ग के कर्मचारियों को हर साल और समूह घ के कर्मचारियों को हर 5 साल में अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा.
  • बीमा एजेंसी पर रोक- कोई भी कर्मचारी अपनी पत्नी या आश्रित रिश्तेदार को उस जिले में बीमा एजेंट के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं देगा, जहां वो खुद तैनात है.

इस तरह आचरण नियमावली में कुछ बिंदुओं पर संशोधन किया गया है. ताकि, पुराने नियमों के करण आ रही दिक्कतों को दूर किया जा सके. ऐसे में अब किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति के खरीद या बिक्री की सूचना अपने नियुक्ति या समुचित प्राधिकारी को देनी होगी. यह सूचना एक महीने के भीतर देनी होगी.

You may have missed