देवदूत बनकर आए सुरेंद्र सिंह रावत: रुक्मणी उत्कर्ष फाउंडेशन ने लिया अनाथ मासूम रचिता की शिक्षा का संकल्प
देवदूत बनकर आए सुरेंद्र सिंह रावत: रुक्मणी उत्कर्ष फाउंडेशन ने लिया अनाथ मासूम रचिता की शिक्षा का संकल्प
*कीर्ति नगर (देवप्रयाग):* मानवता की सेवा और परोपकार की एक मिसाल पेश करते हुए, रुक्मणी उत्कर्ष फाउंडेशन के संस्थापक सुरेंद्र सिंह रावत ने देवप्रयाग के नौड़ा धौलियाणा (चौनिखाल) क्षेत्र की 8 वर्षीय मासूम रचिता नेगी को गोद लिया है। संस्था अब रचिता की आजीवन शिक्षा-दीक्षा का संपूर्ण खर्च वहन करेगी।
*विपदाओं के बीच संघर्ष कर रहा था परिवार*
रचिता की कहानी अत्यंत मार्मिक है। मात्र 8 वर्ष की उम्र में उसने कई बड़े आघात झेले हैं। कुछ वर्ष पूर्व उसके पिता स्वर्गीय करण सिंह नेगी का देहांत हो गया था, जिसके बाद उसकी माता ने पुनर्विवाह कर लिया। मासूम रचिता की जिम्मेदारी उसके वृद्ध दादा बुद्धि सिंह नेगी और दादी उर्मिला देवी के कंधों पर आ गई।
पर्वतीय क्षेत्र की विषम परिस्थितियों और आर्थिक तंगी के कारण दादा-दादी के लिए पोती का भविष्य संवारना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी से लेकर प्रशासन और सरकार तक मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें कहीं से कोई ठोस सहायता प्राप्त नहीं हुई।
*रुक्मणी उत्कर्ष फाउंडेशन की पहल*ज
ब इस परिवार की दयनीय स्थिति की सूचना सुरेंद्र सिंह रावत को मिली, तो उन्होंने तुरंत सहायता का हाथ बढ़ाया। सोमवार को उन्होंने ग्राम नौड़ा धौलियाणा पहुंचकर परिवार से मुलाकात की।तत्काल सहायता: सुरेंद्र सिंह रावत ने प्रारंभिक सहायता के तौर पर ₹5100 का चेक सौंपा।आजीवन जिम्मेदारी:उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में रचिता की पढ़ाई-लिखाई का सारा खर्च रुक्मणी उत्कर्ष फाउंडेशन उठाएगा।
भावुक क्षण:मदद पाकर वृद्ध दादा-दादी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि सुरेंद्र सिंह रावत और उनकी संस्था उनके लिए “देवरूप” में सामने आई है।वही बच्ची की दादी उर्मिला देवी ने कहा कि जब सरकार और प्रशासन से उम्मीदें टूट चुकी थीं, तब सुरेंद्र सिंह रावत जी ने हमारी पोती के भविष्य को अंधकार से बाहर निकाला है। हम इस करुणापूर्ण मदद के लिए सदैव आभारी रहेंगे।
देहरादून —-मोनू राजवान ✍️✍️✍️
